Akbar Birbal Hindi Stories | अकबर बीरबल हिंदी कहानियाँ
अकबर (Akbar) भारतवर्ष के एक माहान राजा थे जो कला और बुद्धिमत्ता के बड़े प्रशंसक थे ।
इसी वजह से उन्होंने पूरे राज्य से चुनकर 9 रत्न अपने राजदरबार में अपने मंत्री के तौर पे रखे थे ।
इन्ही 9 रत्नो में अकबर के सबसे प्रिय रत्न थे बीरबल (Birbal)।
बीरबल जिन्हे राजा बीरबल (Raja Birbal) भी कहा जाता था, अपनी बुद्धिमत्ता के लिए सर्वप्रिय और बहुचर्चित थे ।
एक न्याय प्रिय राजा और एक मेधावी मंत्री की ये जोड़ी न सिर्फ अपने ज़माने में बल्कि आज भी अपने किस्सों के माध्यम से सबके दिलो में राज करती है ।
हमने अकबर बीरबल की कहानियों (Akbar Birbal Stories in Hindi) का यह संग्रह बनाया है आप सब के लिए, ताकि आप मनोरंजन के साथ ही शिक्षा भी प्राप्त कर पाएं ।
तो आईये मिलकर पढ़ते है अकबर बीरबल की कहानियाँ (Akbar Birbal Stories in Hindi)
Collection of Akbar Birbal Stories in Hindi| अकबर बीरबल की हिंदी कहानियाँ | Akbar Birbal ki kahaniya in hindi
1) पाँच मूर्खों की पेशकश - Akbar Birbal ki kahani
एक बार की बात है, राजा अकबर अपने राज्य की सैर पर निकले हुए थे की अचानक से उन्हें एक गधे की आवाज़ आयी ।
आम तौर पर अकबर लोगों के मसलो और युद्ध और व्यापर के मामलो में इतने उलझे रहते थे की इन छोटी चीज़ो पर उनका ध्यान नहीं जाता था ।
पता नहीं कहाँ से, अचानक ही उनके मन में ये उत्सुकता जगी की इस इतने बड़े राज्य में सबसे मुर्ख इंसान कौन होगा ।
इसी बात पर उन्होंने ये सवाल अपने एक मंत्री से पूछा जो उनके साथ ही सैर कर रहे थे ।
अब उस मंत्री को तो इसका उत्तर क्याही पता होता, पर उसे काफी लोगो की तरह बीरबल के राजा के इतने करीबी होने पर इर्षा थी ।
तो उसने मौके का सही फायदा उठाते हुए अकबर से कहा
" महाराज आपका प्रश्न का उत्तर एक ही शख्स दे सकता ह वो ह महाराजा बीरबल "
उस मंत्री का मकसद था की इत्ते बड़े राज्य में बीरबल को पूरी ज़िन्दगी लग जाएगी सबसे मुर्ख व्यक्ति को ढूंढने मैं और राजा को ये सिद्ध करने में की वो चार लोग ही सबसे मुर्ख क्युं हैं ॥
बस फिर क्या था, अकबर को भी एक और मौका मिल गया बीरबल की बुद्धिमत्ता का आंकलन करने का ।
उन्होंने अपनी सैर पूरी की और अगले दिन एकदम सुबह सुबह दरबार बुला लिया
उनकी पूरी रात यही सोचने में निकल गयी की कोण हो सकता है सबसे मुर्ख व्यक्ति
इसी सोच में न वो अपनी रानियों को नाही अपने परिवार को उतने अच्छे से समय दे पाए
नाही उन्हें रात में अच्छी नींद आयी
अगले दिन दरबार में जैसे ही सारे दरबारी और नौ मंत्रियो ने अकबर का अभिनन्दन करके अपनी अपनी कुर्सियां ली , अकबर का पहला सवाल यही था
अकबर बोले, की कल हम सैर करते समय अचानक इस सोच में पड गए की इस राज्य का सबसे मुर्ख इंसान कौन हो सकता है
बस उसके बाद से हमारा चैन और सुकून सब उजड़ा हुआ सा है ।
तो हम चाहते हैं की बीरबल तुम इस बात का पता लगाओ की इस राज्य के सबसे मुर्ख पांच व्यक्ति कौन कौन है
साथ ही हम ये घोषणा करते है की अगर तुम ये पांच व्यक्ति कलतक नहीं ला पाए तो तुम्हारी जगह जो हमे ये पांच व्यक्ति लाकर देगा वही तुम्हारी जगह हमारे नवरत्नों में श्रेष्ठ स्थान प्राप्त करेगा
बस इतना सुन्ना था की बाकी सभी आठ रत्नो के चेहरे खिल गए ।
साथ ही सब लोग मूर्खो की खोज में लग गए
अब क्यूंकि राजा का हुक्म था तो बीरबल को इसका कुछ तो उपाए ढूँढना ही था
वो अपने घोड़े प बैठ कर नदी की तरफ निकल गए
रास्ते में उन्हें एक व्यक्ति दिखा जो बेहद खुश था
बीरबल ने पूछा " क्या बात है जनाब आप इतने खुश किस बात से है "
इस पर वो आदमी बोला " मै शादी में जा रहा हूँ, इसलिए इतना खुश हूँ "
बीरबल ने फिर पूछा " लगता है किसी करीबी की शादी है "
इस पर वो आदमी बोला " हाँ मेरी पत्नी की शादी है "
बस फिर क्या था बीरबल ने अपने साथ आ रहे दो सैनिको को इशारे से बताया की जैसे ही ये शादी से हो आये इसे राजदरबार में ले आना
बस इतना कह कर वो आगे चल दिए
अब दोपहर हो आयी थी और धुप भी तेज़ हो गयी थी
तभी बीरबल को एक अजीबो गरीब चीज़ दिखी
एक आदमी गधे पर बैठ क सर पर बोझा उठाए कहीं जा रहा था
यह देखकर बीरबल उस आदमी की तरफ बढ़ गए
जब वो उस आदमी से मिले तो उससे पूछा
बीरबल - " क्यों भाई क्या हो गया है जो इत्ती गर्मी में भी तुम इस गधे प बैठ कर खुद सर पर इस बोझे को उठाए हुए हो "
इस पर वह आदमी बोला - " बीरबल जी ये गधी पेट से है, तो मै इस पर से से कुछ बोझ काम करने के लिए खुद बोझ उठा रहा हूँ "
बस फिर क्या था बीरबल खुश हो गया और सैनिको को उसे अपने साथ राजमहल लेजाने को कहा
बस ये सब हो के थोड़े ही आगे बढे तो उन्होंने देखा की एक व्यक्ति जंगल में लकड़ी काट रहा है
पर जो बात हैरान करने वाली थी वो यह थी की वो जिस डगाल पर बैठा था उसी को काट रहा था
उसे देखते ही बीरबल समझ गया की राजा की शर्त पूरी होने के और करीब पहुंच चुकी है
अब उन्हें तीन मुर्ख मिल गए थे
तलाश थी तो चौथे और पांचवे मूर्खों की
पर क्युकी अब रात भी बहोत हो गयी थी और वापस महल भी जाना था तो बीरबल कुछ देर कुछ सोच क वापस चले गए
अब अगले दिन अकबर फिर बेचैन था
साथ ही उसे यह भी उत्सुकता थी की बीरबल ने उत्तर ढूंढ लिया या नहीं
बस इसी उत्सुकता में सुबह दरबार शुरू करते ही अकबर ने बीरबल की मांग की
बीरबल कुछ उदास से दिख रहे थे, पर जब अकबर ने पांच मूर्खो की मांग की तो बीरबल ने सैनिको से तीनो मूर्खो को लाने को कहा
बीरबल ने एक एक करके सभी मूर्खों की मूर्खता के किस्से सुनाए
किस्से सुनकर पूरा दरबार हसी के ठहाके मारने लगा
यह सुन कर अकबर भी काफी खुश थे, साथ ही उन्हें अगले मूर्ख के बारे में जानने की उत्सुकता भी थी
इस उत्सुकता में अकबर बोल उठे
बहुत बढ़िया पर बाकी के दो मूर्ख कहाँ है
तुम्हे याद तो है ना की हमने पाँच मूर्ख लाने को कहा था
यह सुन कर बीरबल बोले " जी जहापनाह, मुझे याद है आपने पाँच मूर्खो को लेन को कहा था "
अबकर - " तो पेश करो बाकी दो मूर्खो को दरबार में "
बीरबल - " जहापनाह वो दोनों दरबार में ही मौजूद है, पर उन्हें पेश करने से पहले मुझे आपकी अनुमति की ज़रूरत पड़ेगी "
अकबर - " हाँ उन्हें पेश करो बिना वक़्त गवाए "
बीरबल - " गुस्ताखी के लिए माफ़ी, पर चौथे मूर्ख है आप, जो ऐसे काम करने बोल रहे है
बीरबल - " और पांचवा मूर्ख हु मै जो ऐसे काम कर रहा हु "
यह सुनते ही पूरा दरबार एकदम सन्नाटे में था
अकबर के मुँह पर उनकी ऐसी बेइज़्ज़ती करने का कोई सोच भी नहीं सकता था
पर अकबर भी बुद्धिमत्ता की बहुत कदर करते थे
वो हस्ते हुए बीरबल के पास गए और उनकी तारीफ करते हुए बोले
तुमने सच ही कहा है मै व्यर्थ ही अपना और सबका समय बर्बाद कर रहा था
तुमने फिर एक बार अपनी बुद्धिमत्ता से ये साबित कर दिया है की तुम वाकई अनमोल हो ॥
बहुत बढ़िया पर बाकी के दो मूर्ख कहाँ है
तुम्हे याद तो है ना की हमने पाँच मूर्ख लाने को कहा था
यह सुन कर बीरबल बोले " जी जहापनाह, मुझे याद है आपने पाँच मूर्खो को लेन को कहा था "
अबकर - " तो पेश करो बाकी दो मूर्खो को दरबार में "
बीरबल - " जहापनाह वो दोनों दरबार में ही मौजूद है, पर उन्हें पेश करने से पहले मुझे आपकी अनुमति की ज़रूरत पड़ेगी "
अकबर - " हाँ उन्हें पेश करो बिना वक़्त गवाए "
बीरबल - " गुस्ताखी के लिए माफ़ी, पर चौथे मूर्ख है आप, जो ऐसे काम करने बोल रहे है
बीरबल - " और पांचवा मूर्ख हु मै जो ऐसे काम कर रहा हु "
यह सुनते ही पूरा दरबार एकदम सन्नाटे में था
अकबर के मुँह पर उनकी ऐसी बेइज़्ज़ती करने का कोई सोच भी नहीं सकता था
पर अकबर भी बुद्धिमत्ता की बहुत कदर करते थे
वो हस्ते हुए बीरबल के पास गए और उनकी तारीफ करते हुए बोले
तुमने सच ही कहा है मै व्यर्थ ही अपना और सबका समय बर्बाद कर रहा था
तुमने फिर एक बार अपनी बुद्धिमत्ता से ये साबित कर दिया है की तुम वाकई अनमोल हो ॥
2) जो होता है अच्छे के लिए होता है - Akbar Birbal ki kahani in Hindi
बीरबल बहुत ही धार्मिक इंसान थे और इसीलिए उनका मानना था की ईश्वर जो भी करता है अच्छे के लिए ही करता है ।
यही बात वो बार बार दोहरते भी रहते थे
क्यूंकि बीरबल अकबर के काफी प्रिय थे इसीलिए बाकी दरबारी जो उनसे जलते थे कोई मौका नहीं छोड़ना चाहते थे उन्हें नीचा दिखाने का
एक दिन ऐसे ही किसी घोषणा के बाद बीरबल बोल रहे थे की जो भी होता है अच्छे के लिए होता है
बस ये बोलना ही था की एक दरबारी बोल उठा
दरबारी - " मुझे माफ़ कीजियेगा पर ये बीरबल कुछ भी बोलते रहते है "
इसपर अकबर बोल उठे
अकबर - " विस्तार से बताओ तुम ऐसा क्यों बोल रहे हो "
दरबारी - " जहाँपनाह अब देखिये ना ये बीरबल जब देखो बोलते रहते है, की जो होता है अच्छे के लिए होता है "
अकबर - " हाँ तो इसमें अनुचित क्या है ?"
दरबारी - " जहाँपनाह कल अपनी गायों के लिए चारा काटे वक़्त मेरे हाथ की छोटी ऊँगली थोड़ी सी काट गयी "
ऐसा कह कर उसने अपनी लहू लुहान ऊँगली पट्टी में बंधी हुई सारे दरबार को दिखाई
यह देखकर अकबर भी सेहम गए
दरबारी - " जहाँपनाह मुझे ये नहीं समझ आरा की इसमें अच्छा क्या है ? "
इस पर अकबर बीरबल की ओर देखने लगे
बीरबल - " जहाँपनाह हम इंसानो को सिर्फ वर्त्तमान का ही दिखता है इसलिए हमें हर चीज़ समझ नहीं आती , पर मै तो अब भी कहूंगा की जो भी होता है अच्छे के लिए ही होता है "
इस बात पर सारे दरबारी और अकबर खुद भी बीरबल से खफा दिखे
अकबर चाहते थे की बीरबल कुछ बताए की ऐसा कैसे हो सकता है की ऊँगली का काट जाना किसी के लिए अच्छा साबित हो
अकबर - " बीरबल क्या तुम ये साबित कर सकते हो?"
बीरबल - " जहाँपनाह आप कुछ दिन इंतज़ार कीजिये ईश्वर खुद बा खुद यह साबित कर देगा "
इस पर अकबर ने उस दरबारी से कहा की इस वजह से अगर उसे कोई भी फायदा हो तो तुरंत दरबार में पेश होकर सबको बताए
अकबर बहुत ही उत्सुक थे
इसी उत्सुकता में उन्होंने उस दरबारी की गुप्त रूप से निगरानी रखने के लिए दो लोग भी लगवा दिए क्यूंकि उन्हें शक था की खिन ऐसा ना हो की बीरबल की बात गलत सिद्ध करने में दरबारी कुछ शुभ होने पर भी ना बताए
बस फिर क्या था कुछ दिन बीत गए
एक दिन वो दरबारी जंगल से सफर कर खिन दूसरे गाओं जा रहा था
उसी जंगल में एक आदिवासी लोगो का समूह रहता था
वो आदिवासी लोग अपने पूर्वजो की आत्मा की शांति और अपने ईश्वर को प्रसन्न करने के लिए युवा लोगो की बलि देने में विश्वास रखते थे
बस फिर क्या था
जंगल में चलते चलते उनका सामना इस दरबारी से हो गया
दरबारी दिखने में काफी हष्ट पुष्ट था तो उन्होंने इसे तुरंत पकड़ लिया
दरबारी को बंधी बना कर वो लोग उसे बलि के लिए तैयार करने लगे
उसे बलि से पहले अच्छी तरह से दूध से नहलाने लगे
दरबारी को लगने लगा की पता नई क्या मनहूसियत लगी है कुछ दिनों से उसके पीछे, पहले ऊँगली काट गयी, अब गर्दन काटने जारी है
उसे बीरबल की बात याद आयी की जो होता है अच्छे के लिए होता है
और उसे बीरबल से और भी ईर्ष्या होने लगी
तभी नहलाते समय उनमे से एक आदिवासी का ध्यान उसके हाथ पर गया जिसमे एक ऊँगली कटी हुई थी
ये देखते ही वो कुछ बोल के ज़ोर ज़ोर से चिल्लाने लगा
यह सब देख कर दरबारी और दर गया , उसे लगने लगा की अब तो वो पक्का गया
थोड़ी ही देर में वहां सारे आदिवासी और उनका मुखिया इखट्टे हो गए थे
उस आदिवासी ने मुखिया को उसकी ऊँगली दिखाते हुए कुछ कहा
उसकी ऊँगली देखकर मुखिया भी उदास हो गया
दरबारी को कुछ समझ नहीं आ रहा था की हो क्या रहा है
वो अपनी जान की भीक मांगने लगा
तभी मुखिया ने आदेश दिया की दरबारी को छोड़ दो
यह सुन कर दरबारी भौचक्का रह गया
तब उनके मुखिया, जिसे हिंदी आती थी उसने कहा
हम अपने ईश्वर को हष्ट पुष्ट चीज़ ही चढ़ाते है
क्यूंकि तुम्हारी ऊँगली कटी हुई है इसलिए तुम्हारी बलि से व्यर्थ ही हमारे ईश्वर नाराज़ हो जाएंगे
यह कह कर उन्होंने दरबारी को छोड़ दिया
दरबारी को बीरबल की बात याद आयी की जो होता है अच्छे के लिए ही होता है
वो अपनी जान बचने की ख़ुशी में इतना पगलाया हुआ था की बिना कुछ सोचे समझे सीधा राजदरबार की तरफ भागा
वहां वो जाके बीरबल के चरणों म गिर के रोने लग गया
अकबर समझ चुके थे की हो ना हो बीरबल की बात सत्य हुई है
उन्होंने दरबारी को अपनी बात बताने को कहा
दरबारी - " जहाँपनाह बीरबल की कही बात शत प्रतिशत सही है, और मै इसका जीता जगता उदाहरण हु "
दरबारी - " महाराज मै जंगल से गुज़र रहा था की मुझे आदिवासियों से बलि देने के लिए पकड़ लिया था, पर जब उन्होंने देखा की मेरी एक ऊँगली कटी हुई है तो मुझे छोड़ दिया "
दरबारी - " अगर आज मेरी ऊँगली नहीं कटी होती तो मेरी गर्दन काट जनि थी "
यह सुनते ही अकबर के चेहरे पर एक मुस्कान और बीरबल के प्रति एक प्रेम वाला भाव साफ़ दिख रहा था
वो बीरबल की तरफ देखते हुए बोले
अकबर - " कुछ भी कहो बीरबल पर तुम और तुम्हारी बातें नायब होती है "
इस पर बीरबल बोले
बीरबल - " जहाँपनाह मै तो बस सच्ची बातें करता हु, अच्छी वो अपने आप लग जाती है "
यह सुनकर सब ठहाके मार कर हसने लगे
जो कुछ लोग बीरबल से ईर्ष्या करते थे मन ही मन वो भी बीरबल की प्रशंसा कर रहे थे
दरबारी अपनी जान बच जाने पर बहुत ही खुश था और अकबर इस बात से बेहद खुश थे की उन्हें बीरबल जैसे भुद्धिमान व्यक्ति का साथ मिला ॥
एक दिन अकबर बड़े ही गुरुर में बैठे थे तो उनका मन किया ये जान्ने का की इस दुनिया में सबसे बड़ा कौन है
वो इस आशा में थे की सब उनका ही नाम लेंगे
हाल फिलहाल में ही काफी राज्य जीतने के बाद उनका साम्राज्य भी काफी बढ़ चुका था
बस फिर क्या था सभी दरबारी चापलूसी में लग गए और कहने लगे की बेशक अकबर ही सबसे बड़े है
बीरबल अपनी जगह चुप बैठे हुए थे
अकबर जानते थे की बाकि कोई कुछ भी बोल ले पर बीरबल एकदम सत्य वचन ही बोलते है
बस फिर क्या था वो बीरबल को चुप देखकर बोल उठे की बीरबल तुम क्यों चुप हो
तुम्हे कौन सबसे बड़ा लगता है दुनिया में
अब सबकी नज़रें बीरबल और उनके उत्तर पर थी
बीरबल जानते थे की अगर अकबर को सही समय में ये शिक्षा नहीं दी गयी की उन्हें घमंड नहीं करना चाहिए तो दिक्कत हो सकती है
बीरबल - " माफ़ कीजियेगा जहाँपनाह पर मुझे सबसे बड़ा एक छोटा बच्चा लगता है "
इस पर अकबर चिल्ला उठे और बोले
अकबर - " कैसी बेतुकी बातें कर रहे हो, भला कोई छोटा बच्चा हमसे बड़ा कैसे हो सकता है "
अकबर यहाँ तक बोल उठे की इस बात की जल्द ही उदाहरण के साथ समझाओ वार्ना तम्हे दंड दिया जाएगा
यह सुनकर पूरे दरबार में सन्नाटा छा गया
जो लोग बीरबल से जलते थे उनके चेहरे खिल गए थे
तब बीरबल ने दासी को इशारे से कहा की जहाँपनाह के बच्चे को लेकर उन्हें थमा दे
बस दासी ने जैसे तैसे किसी बहाने से राजकुमार को अकबर को पकड़ा दिया
अकबर को बच्चो से बहुत प्रेम था
और अपने लादले को गोद में लेकर वो बहुत प्रसन्न होकर उसके साथ खेलने लग गए
अब छोटे बच्चो को तो आदत होती ही है जो चीज़ हाथ में आये पकड़ क खेलने लग जाने की
बस थोड़ी ही देर में बच्चे ने अकबर की दाढ़ी पकड़ ली
बस फिर क्या था वो उसे खीचने लग गया
अकबर को बड़ा अजीब सा लगा पर क्यूंकि बच्चा ऐसा कर के काफी खुश था तो अकबर भी ख़ुशी ख़ुशी उसके साथ खेलते रहे
थोड़ी देर में बच्चे को खेलते खेलते नींद आ गयी तो अकबर ने उसे वापस दासी को पकड़ा दिया
पर अभी भी अकबर भूले नहीं थे की बीरबल ने उनके साथ गुस्ताखी की थी उन्हें छोटा बोलकर
वो फिर बीरबल पर बरसने लगे और बोले
अकबर - " बीरबल क्या तुम अपनी कही बात साबित कर सकते हो ? "
इस पर बीरबल बोले
बीरबल - " जहाँपनाह आपने खुद ही सबके सामने ये अभी अभी साबित कर दिया "
अकबर - " क्या बोल रहे हो, विस्तार से बताओ "
बीरबल - " जैसा की सबने देखा क्या किसी व्यक्ति में इत्ता साहस हो सकता है की भरी सभा में आपके दरबार में आप की दाढ़ी खीचें ?"
अकबर भौचक्के हो चुके थे
बीरबल - " पर जैसा की आपने सबने अभी देखा, वो छोटा राजकुमार ना सिर्फ जहाँपनाह की दाढ़ी खींच रहा था बल्कि यह बात जहाँपनाह को अच्छी भी लग रही थी "
बाद इतना बोलना ही था की अकबर ने उठकर बीरबल को गले लगा लिया
वो बोल उठे इसे कहते है सच्चा शुभ चिंतक जिस तरह प्रेम की वजह से वो बच्चा मेरी दाढ़ी भी खींच रहा था तबभी मुझे कोई फर्क नहीं पड़ा
ठीक उसी तरह इस राज्य को भी प्रेम से जीता जा सकता है ना की बल और हिंसा से
यह कहकर उन्होंने बीरबल की खुले दिल से तारीफ़ करते हुए उन्हें इनाम से नवाज़ा
सारे जलने वालो के मु लटके हुए थे ॥
Category :
Akbar Birbal ki kahani in Hindi
Akbar aur Birbal ki kahani
Akbar Birbal ki Kahaniyan hindi mein
Akbar Birbal Stories in Hindi
यही बात वो बार बार दोहरते भी रहते थे
क्यूंकि बीरबल अकबर के काफी प्रिय थे इसीलिए बाकी दरबारी जो उनसे जलते थे कोई मौका नहीं छोड़ना चाहते थे उन्हें नीचा दिखाने का
एक दिन ऐसे ही किसी घोषणा के बाद बीरबल बोल रहे थे की जो भी होता है अच्छे के लिए होता है
बस ये बोलना ही था की एक दरबारी बोल उठा
दरबारी - " मुझे माफ़ कीजियेगा पर ये बीरबल कुछ भी बोलते रहते है "
इसपर अकबर बोल उठे
अकबर - " विस्तार से बताओ तुम ऐसा क्यों बोल रहे हो "
दरबारी - " जहाँपनाह अब देखिये ना ये बीरबल जब देखो बोलते रहते है, की जो होता है अच्छे के लिए होता है "
अकबर - " हाँ तो इसमें अनुचित क्या है ?"
दरबारी - " जहाँपनाह कल अपनी गायों के लिए चारा काटे वक़्त मेरे हाथ की छोटी ऊँगली थोड़ी सी काट गयी "
ऐसा कह कर उसने अपनी लहू लुहान ऊँगली पट्टी में बंधी हुई सारे दरबार को दिखाई
यह देखकर अकबर भी सेहम गए
दरबारी - " जहाँपनाह मुझे ये नहीं समझ आरा की इसमें अच्छा क्या है ? "
इस पर अकबर बीरबल की ओर देखने लगे
बीरबल - " जहाँपनाह हम इंसानो को सिर्फ वर्त्तमान का ही दिखता है इसलिए हमें हर चीज़ समझ नहीं आती , पर मै तो अब भी कहूंगा की जो भी होता है अच्छे के लिए ही होता है "
इस बात पर सारे दरबारी और अकबर खुद भी बीरबल से खफा दिखे
अकबर चाहते थे की बीरबल कुछ बताए की ऐसा कैसे हो सकता है की ऊँगली का काट जाना किसी के लिए अच्छा साबित हो
अकबर - " बीरबल क्या तुम ये साबित कर सकते हो?"
बीरबल - " जहाँपनाह आप कुछ दिन इंतज़ार कीजिये ईश्वर खुद बा खुद यह साबित कर देगा "
इस पर अकबर ने उस दरबारी से कहा की इस वजह से अगर उसे कोई भी फायदा हो तो तुरंत दरबार में पेश होकर सबको बताए
अकबर बहुत ही उत्सुक थे
इसी उत्सुकता में उन्होंने उस दरबारी की गुप्त रूप से निगरानी रखने के लिए दो लोग भी लगवा दिए क्यूंकि उन्हें शक था की खिन ऐसा ना हो की बीरबल की बात गलत सिद्ध करने में दरबारी कुछ शुभ होने पर भी ना बताए
बस फिर क्या था कुछ दिन बीत गए
एक दिन वो दरबारी जंगल से सफर कर खिन दूसरे गाओं जा रहा था
उसी जंगल में एक आदिवासी लोगो का समूह रहता था
वो आदिवासी लोग अपने पूर्वजो की आत्मा की शांति और अपने ईश्वर को प्रसन्न करने के लिए युवा लोगो की बलि देने में विश्वास रखते थे
बस फिर क्या था
जंगल में चलते चलते उनका सामना इस दरबारी से हो गया
दरबारी दिखने में काफी हष्ट पुष्ट था तो उन्होंने इसे तुरंत पकड़ लिया
दरबारी को बंधी बना कर वो लोग उसे बलि के लिए तैयार करने लगे
उसे बलि से पहले अच्छी तरह से दूध से नहलाने लगे
दरबारी को लगने लगा की पता नई क्या मनहूसियत लगी है कुछ दिनों से उसके पीछे, पहले ऊँगली काट गयी, अब गर्दन काटने जारी है
उसे बीरबल की बात याद आयी की जो होता है अच्छे के लिए होता है
और उसे बीरबल से और भी ईर्ष्या होने लगी
तभी नहलाते समय उनमे से एक आदिवासी का ध्यान उसके हाथ पर गया जिसमे एक ऊँगली कटी हुई थी
ये देखते ही वो कुछ बोल के ज़ोर ज़ोर से चिल्लाने लगा
यह सब देख कर दरबारी और दर गया , उसे लगने लगा की अब तो वो पक्का गया
थोड़ी ही देर में वहां सारे आदिवासी और उनका मुखिया इखट्टे हो गए थे
उस आदिवासी ने मुखिया को उसकी ऊँगली दिखाते हुए कुछ कहा
उसकी ऊँगली देखकर मुखिया भी उदास हो गया
दरबारी को कुछ समझ नहीं आ रहा था की हो क्या रहा है
वो अपनी जान की भीक मांगने लगा
तभी मुखिया ने आदेश दिया की दरबारी को छोड़ दो
यह सुन कर दरबारी भौचक्का रह गया
तब उनके मुखिया, जिसे हिंदी आती थी उसने कहा
हम अपने ईश्वर को हष्ट पुष्ट चीज़ ही चढ़ाते है
क्यूंकि तुम्हारी ऊँगली कटी हुई है इसलिए तुम्हारी बलि से व्यर्थ ही हमारे ईश्वर नाराज़ हो जाएंगे
यह कह कर उन्होंने दरबारी को छोड़ दिया
दरबारी को बीरबल की बात याद आयी की जो होता है अच्छे के लिए ही होता है
वो अपनी जान बचने की ख़ुशी में इतना पगलाया हुआ था की बिना कुछ सोचे समझे सीधा राजदरबार की तरफ भागा
वहां वो जाके बीरबल के चरणों म गिर के रोने लग गया
अकबर समझ चुके थे की हो ना हो बीरबल की बात सत्य हुई है
उन्होंने दरबारी को अपनी बात बताने को कहा
दरबारी - " जहाँपनाह बीरबल की कही बात शत प्रतिशत सही है, और मै इसका जीता जगता उदाहरण हु "
दरबारी - " महाराज मै जंगल से गुज़र रहा था की मुझे आदिवासियों से बलि देने के लिए पकड़ लिया था, पर जब उन्होंने देखा की मेरी एक ऊँगली कटी हुई है तो मुझे छोड़ दिया "
दरबारी - " अगर आज मेरी ऊँगली नहीं कटी होती तो मेरी गर्दन काट जनि थी "
यह सुनते ही अकबर के चेहरे पर एक मुस्कान और बीरबल के प्रति एक प्रेम वाला भाव साफ़ दिख रहा था
वो बीरबल की तरफ देखते हुए बोले
अकबर - " कुछ भी कहो बीरबल पर तुम और तुम्हारी बातें नायब होती है "
इस पर बीरबल बोले
बीरबल - " जहाँपनाह मै तो बस सच्ची बातें करता हु, अच्छी वो अपने आप लग जाती है "
यह सुनकर सब ठहाके मार कर हसने लगे
जो कुछ लोग बीरबल से ईर्ष्या करते थे मन ही मन वो भी बीरबल की प्रशंसा कर रहे थे
दरबारी अपनी जान बच जाने पर बहुत ही खुश था और अकबर इस बात से बेहद खुश थे की उन्हें बीरबल जैसे भुद्धिमान व्यक्ति का साथ मिला ॥
3) सबसे बड़ा कौन - Akbar Birbal ki kahani in Hindi
वो इस आशा में थे की सब उनका ही नाम लेंगे
हाल फिलहाल में ही काफी राज्य जीतने के बाद उनका साम्राज्य भी काफी बढ़ चुका था
बस फिर क्या था सभी दरबारी चापलूसी में लग गए और कहने लगे की बेशक अकबर ही सबसे बड़े है
बीरबल अपनी जगह चुप बैठे हुए थे
अकबर जानते थे की बाकि कोई कुछ भी बोल ले पर बीरबल एकदम सत्य वचन ही बोलते है
बस फिर क्या था वो बीरबल को चुप देखकर बोल उठे की बीरबल तुम क्यों चुप हो
तुम्हे कौन सबसे बड़ा लगता है दुनिया में
अब सबकी नज़रें बीरबल और उनके उत्तर पर थी
बीरबल जानते थे की अगर अकबर को सही समय में ये शिक्षा नहीं दी गयी की उन्हें घमंड नहीं करना चाहिए तो दिक्कत हो सकती है
बीरबल - " माफ़ कीजियेगा जहाँपनाह पर मुझे सबसे बड़ा एक छोटा बच्चा लगता है "
इस पर अकबर चिल्ला उठे और बोले
अकबर - " कैसी बेतुकी बातें कर रहे हो, भला कोई छोटा बच्चा हमसे बड़ा कैसे हो सकता है "
अकबर यहाँ तक बोल उठे की इस बात की जल्द ही उदाहरण के साथ समझाओ वार्ना तम्हे दंड दिया जाएगा
यह सुनकर पूरे दरबार में सन्नाटा छा गया
जो लोग बीरबल से जलते थे उनके चेहरे खिल गए थे
तब बीरबल ने दासी को इशारे से कहा की जहाँपनाह के बच्चे को लेकर उन्हें थमा दे
बस दासी ने जैसे तैसे किसी बहाने से राजकुमार को अकबर को पकड़ा दिया
अकबर को बच्चो से बहुत प्रेम था
और अपने लादले को गोद में लेकर वो बहुत प्रसन्न होकर उसके साथ खेलने लग गए
अब छोटे बच्चो को तो आदत होती ही है जो चीज़ हाथ में आये पकड़ क खेलने लग जाने की
बस थोड़ी ही देर में बच्चे ने अकबर की दाढ़ी पकड़ ली
बस फिर क्या था वो उसे खीचने लग गया
अकबर को बड़ा अजीब सा लगा पर क्यूंकि बच्चा ऐसा कर के काफी खुश था तो अकबर भी ख़ुशी ख़ुशी उसके साथ खेलते रहे
थोड़ी देर में बच्चे को खेलते खेलते नींद आ गयी तो अकबर ने उसे वापस दासी को पकड़ा दिया
पर अभी भी अकबर भूले नहीं थे की बीरबल ने उनके साथ गुस्ताखी की थी उन्हें छोटा बोलकर
वो फिर बीरबल पर बरसने लगे और बोले
अकबर - " बीरबल क्या तुम अपनी कही बात साबित कर सकते हो ? "
इस पर बीरबल बोले
बीरबल - " जहाँपनाह आपने खुद ही सबके सामने ये अभी अभी साबित कर दिया "
अकबर - " क्या बोल रहे हो, विस्तार से बताओ "
बीरबल - " जैसा की सबने देखा क्या किसी व्यक्ति में इत्ता साहस हो सकता है की भरी सभा में आपके दरबार में आप की दाढ़ी खीचें ?"
अकबर भौचक्के हो चुके थे
बीरबल - " पर जैसा की आपने सबने अभी देखा, वो छोटा राजकुमार ना सिर्फ जहाँपनाह की दाढ़ी खींच रहा था बल्कि यह बात जहाँपनाह को अच्छी भी लग रही थी "
बाद इतना बोलना ही था की अकबर ने उठकर बीरबल को गले लगा लिया
वो बोल उठे इसे कहते है सच्चा शुभ चिंतक जिस तरह प्रेम की वजह से वो बच्चा मेरी दाढ़ी भी खींच रहा था तबभी मुझे कोई फर्क नहीं पड़ा
ठीक उसी तरह इस राज्य को भी प्रेम से जीता जा सकता है ना की बल और हिंसा से
यह कहकर उन्होंने बीरबल की खुले दिल से तारीफ़ करते हुए उन्हें इनाम से नवाज़ा
सारे जलने वालो के मु लटके हुए थे ॥
Also read:
Category :
Akbar Birbal ki kahani in Hindi
Akbar aur Birbal ki kahani
Akbar Birbal ki Kahaniyan hindi mein
Akbar Birbal Stories in Hindi

0 Comments