Best Stories in Hindi with Moral - मोटिवेशन से भरपूर कहानियाँ


मोटिवेशन से भरपूर कहानियाँ ( Best Stories in Hindi with Moral) जो आपको सीखने और सोचने पर मजबूर कर देगी

कहानियो में दिल को छू लेने की एक अध्भुत क्षमता होती है 

इस वजह से यह कई घंटो तक भी बिना थके बिना रुके पढ़ी जा सकती है 

मोटिवेशनल कहानियाँ दिल को छूने के साथ ही एक सीख भी दे जाती है 

कुछ ऐसी ही सीखों ने कई लोगो की ज़िन्दगियों में जाने अनजाने में कई बदलाव लाए है 

और अगर आपको लगता है की इन कहानियो से आपकी ज़िन्दगी में कुछ बदलाव आ सकता है तो इसे अपने दोस्तों और रिश्तेदारों से भी शेयर करें

Best Stories in Hindi with Moral - मोटिवेशन से भरपूर कहानियाँ



1) बदलते लोग ( अंधी लड़की ) - Best Stories in Hindi with Moral



एक बार की बात है एक अंधी लड़की थी

अंधी होने की वजह से कोई भी उसे पसंद नहीं करता था

क्यूंकि वो अंधी थी तो कोई भी उससे शादी करने से भी कतराता था 

पर एक लड़के को उसका ख्याल रखने में ज़रा भी संकोच नहीं होता था 

वह हमेशा उसके साथ रह कर उसका ध्यान रखा करता था 

उसकी सारी ख्वाइशें पूरी करता था 

कुछ दिनों में ही दोनों को एक दूसरे से प्यार हो गया 

इसी बीच किसी ने उस लड़की को अपनी आँखें दान कर दी

फिर क्या था डॉक्टर के ऑपरेशन के कुछ वक़्त बाद लड़की देख सकती थी

जब उसने आँखें खोली तो उसे दिखा की वो लड़का भी अँधा था 

यह देखकर उसका दिल टूट गया और वो उस लड़के को छोड़ कर अपनी ज़िन्दगी जीने चली गयी 

यह सब जानकार लड़के को बहुत दुःख हुआ 

उसने एक चिट्ठी पर कुछ पंक्तियाँ लिख कर लड़की के घर भिजवा दी और वो देश छोड़ कर खिन और चला गया 

उस चिट्ठी पर लिखी बात पढ़ कर किसी भी इंसान का दिल मुँह को आ जाएगा 

उस चिट्ठी पर लिख था 

" मुझे उम्मीद है तुम मेरी आँखों का ध्यान रखोगी "

Moral:

अक्सर हमलोग जब कुछ पा लेते है तो यह भूल जाते है की कुछ भी पाने के लिए बहुत से लोगो का प्यार, मेहनत और संघर्ष लगता है 

कोई बंदा भले ही अपनी मेहनत से बड़ा बनता हो पर बिना अपने माता पिता बहन भाइयो के समय समय पर मिले साथ के कुछ नहीं कर पाता 

इसलिए कितने भी बड़े बन जाओ पर हमेशा उन्हें याद रखना जिन्होंने तुम्हारा तब साथ दिया था जब सब तुम्हारे खिलाफ थे या साथ नहीं थे 

दोस्तों सफलता में तो दुनिआ ही साथ होती है, जो संघर्ष में साथ होते हैं वहीं असली दोस्त होते हैं, उन्हें कभी मत खोना, वरना तुम सब कुछ पा कर भी सब खो दोगे


यह कहानी मेरी सबसे पसंदीदा कहानियो में से एक है (One of my best stories in Hindi with Moral)





2) जो मन से हार गया सो पक्का हार गया ( शार्क और टंकी ) - Best Stories in Hindi with Moral



एक वक़्त की बात है जब लोगों ने शार्क मछली पर रिसर्च करने की ठानी 

उन्होंने एक बड़ा सा पानी का टैंक बनवाया और शार्क को उसमे छोड़ दिया 

पानी की टंकी बहुत बड़ी थी और शार्क आराम से इधर उधर घूम रही थी 

उन्होंने कुछ मछलिया धागे से बाँध कर टैंक में लटकाई

और जैसा की सबसे सोचा था, शार्क तुरंत उन पर टूट पड़ी और एक एक करके सारी मछलियों को खा गयी 

और शार्क का बदलता व्यवहार देखने के लिए उन्होंने उसे टैंक में एक कांच की दीवार बना के दो हिस्सों में बाँट दिया 

अब उन्होंने ठीक उसी तरह दूसरी तरफ कुछ मछलियाँ पानी में उतारी 

शार्क ने फिर से उन मछलियों की तरफ झपट्टा मारा पर कांच के शीशे से टकरा के उसे खा नहीं पायी 

ऐसा काफी देर तक चलता रहा 

शार्क ने हर तरह से उन मछलियों को पाने की भरपूर कोशिश की पर उन तक पहुंच नहीं पायी 

इसके बाद वो शांत हो गयी और उसने खाने की तरफ जाना भी बंद कर दिया 

फिर कुछ समय बाद वैज्ञानिको ने वो बीच की कांच की दीवार को हटा दिया 

अब अगर शार्क चाहती तो बड़े आराम से उन मछलियों को खा कर अपनी भूक मिटा सकती थी 

पर आप सोच नहीं सकते उसकी हिम्मत इतनी टूट चुकी थी की मछलिया सामने होते हुए भी वो यह मान कर बैठी थी की वो उसकी पहुच से बहार है 

और उसने कभी कोशिश ही नहीं की उन्हें खाने की 


Moral:

ठीक ऐसा ही हमारे ज़िन्दगी में भी होता है 

अपने बाप दादा और करीबी रिश्तेदारों को बार बार किसी चीज़ में असफल होते देख कर हम भी उसे मुश्किल समझ कर हार मान के बैठ जाते है 

कभी कभी हम एक दो बार हार कर चीज़ें करना छोड़ देते है ये सोच कर की अब तो यह हमसे नहीं हो पाएगा 

पर वक़्त और हालात बदलते रहते हैं, साथ ही हर असफलता हमे कुछ ना कुछ सीखा के पहले से बेहतर बनती जाती है

इससे होता यह है की हमारी काबिलियत धीरे धीरे बढ़ते बढ़ते हमे सफलता मिल जाती है, बशर्ते हम उस शार्क की तरह हार मान कर ना बैठ जाएं  



Best Stories in Hindi with Moral - मोटिवेशन से भरपूर कहानियाँ




3) कभी कभी चीज़ें उतनी भी मुश्किल नहीं होती जितनी लगती है - Best Stories in Hindi with Moral



एक बार की बात है एक गांव में कुछ हाथी रहते थे 

एक दिन गांव की सैर करते करते  हाथी का एक बच्चा एक गड्ढे में गिर गया 

गड्ढे में गिरते ही बच्चा बहुत सेहम गया था 

और डर के मारे वो ज़ोर ज़ोर से चिल्लाने लग गया 

उसकी चिंघाड़ सुन कर सारे गांव वाले वहां इखट्टे हो गए 

साथ ही कुछ हाथी, जिनमे उस बच्चे की माँ भी थी वो भी वहां आ गयी 

हाथियों ने बहुत कोशिश की उस बच्चे को सूंड से था के बहार निकलने की 

पर गड्ढा बहुत ही गहरा था और बच्चे को चोट लग्न शुरू हो गयी निकलने की कोशिश में

यह देख कर हाथियों ने भी उसे निकलने की कोशिश करनी बंद कर दी और उसकी माँ उधर ही बैठ कर रोने लग गयी 

यह देख कर गांव वालो ने भी कुछ कुछ तरकीबें लगाई उस बच्चे को बहार निकलने के लिए

यहाँ तक की बड़ी बड़ी मशीनें मंगवा ली उसे खींच कर ऊपर निकलने के लिए

पर जो भी कोशिश करते सब असफल हो जाती

और इतनी असफल कोशिशों की वजह से हाथी के बच्चे को काफी चोटें भी आ चुकी थी 

अब धीरे धीरे अँधेरा भी हो रहा था और मौसम भी खराब होने लग गया था 

बस इतने में ही मूसलाधार बारिश होने लग गयी

यह देख कर सब लोग अपने अपने घरों की तरफ भागने लग गए

सबको लगने लग गया था की इतनी मूसलाधार बारिश में भूखा प्यासा वह हाथी का बच्चा ज़्यादा समय तक ज़िंदा नहीं रह पाएगा 

बस फिर क्या था सब भगवान् से बारिश रुकने की प्राथना करने लग गए

पर बारिश थी की रुकने का नाम नहीं ले रही थी

तभी जो थोड़े बहुत लोग उस गड्ढे क पास अभी भी थे, उन्होंने देखा की बारिश के पानी से गड्ढा भरने लग रहा है 

यह देख कर उनकी चिंता और बढ़ने लग गयी की कहीं ये बच्चा डूब कर ना मर जाए

तब उन्होंने देखा की बच्चा तो खुश है

बच्चे को अब पता चल गया था की जैसे जैसे गड्ढे में पानी भरता जाएगा 

वैसे वैसे वो बड़ी आसानी से तैरता हुआ ऊपर आता जाएगा 

ना कोई चोट का खतरा ना किसी मेहनत की ज़रूरत 

यह देख कर हठी की माँ को भी समझ आ चुका था की इत्ती देर से जो वो मेहनत कर रहे थे वो गलत तरीके से कर रहे थे 

अब तक गांव वाले भी समझ चुके थे की यह ईश्वर का तरीका था उन्हें बताने का की कई बार चीज़ें बेहद आसान होती है

बस ज़रूरत होती है तो सही दिशा में सोचने की 


Moral : 

हमारी ज़िन्दगी में भी कई बार ऐसा समय आता है जब लगता है की इतनी मेहनत बेकार हो गयी

पर अगर थोड़ा दिमाग लगा कर गौर से देखा जाए तो कई बार बहुत छोटे से बदलाव ही ज़मीन आसमान का अंतर बना देते है 

इसी लिए कहा जाता है, सही तरीके से दिमाग लगाओ तो मेहनत कम कर के भी अच्छे परिणाम मिल सकते है  (Work Smarter, Not Harder)





4) अत्यधिक चिंता आपका ही नुक्सान करती है - Best Stories in Hindi with Moral



एक बार की बात है एक अध्यापक अपने क्षात्रों को एक ज़िन्दगी बदलने वाली सीख देना चाहते थे 

इसके लिए वह एक पानी से भरा ग्लॉस लेकर क्लास में आकर सबसे पूछता है 

की आपको क्या लगता है इस ग्लॉस का भार क्या होगा ?

यह सवाल सुनकर सब सोच में पड गए

उन्हें लगा था यह वहीं जाना माना ग्लॉस आधा भरा है की पूरा वाला सवाल होगा

कुछ देर सोचने क बाद सब चिल्लाने लगे की 10 ग्राम, 8 ग्राम...
  
इस पर अध्यापक बोले

बच्चो ग्लॉस का भार इस बात से ज़्यादा की उसमे पानी का वज़न कितना है इस बात पर निर्भर करता है की उसे आपने पकड़ा कितनी देर से है

जहाँ कुछ देर पकड़ने में हाथ में ज़रा भी दर्द नहीं होगा और ग्लॉस भी भरी नहीं लगेगा

वहीँ अगर उसी ग्लॉस को आप काफी देर तक पकड़ कर रखें तो उसका भार अपने आप ज़्यादा लगने लग जाएगा और काफी देर तक पकडे रहने में हाथ में भी दर्द हो जाएगा


Moral :

यही बात हमारी ज़िन्दगी में भी सच है

कोई भी चीज़ पर ज़्यादा देर तक चिंता करने से हमारा हाल उस हाथ की तरह हो जाता है जो ग्लॉस को काफी देर तक पकडे हुए है

इससे ना सिर्फ हमारी काम करने की क्षमता काम होती है, बल्कि हमारा शरीर भी बेवजह खराब हो जाता है

वहीँ अगर हम उन चिंताओं को कुछ देर तक पकडे रहे तो उनका वज़न ज़रा सा भी नहीं लगेगा

इसीलिए कहा जाता है की चिंता करना तो स्वाभाविक है और करनी भी चाहिए, पर उस चिंता पर अत्यधिक चिंतन नहीं करना चाहिए  ॥



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5) बच्चा और हीलियम का गुब्बारा - Best Stories in Hindi with Moral



एक समय की बात है 

एक गाँव में एक मेला लगा हुआ था 

उस मेले में कई सारे खेल और प्रतियोगिताओं का आयोजन था

साथ ही काफी सारी खाने पीने की दुकाने भी लगी हुई थी

खाने पीने की दुकानों के इर्द गिर्द काफी सारी बच्चो को बहलाने वाली खिलौनों की दुकाने भी लगी हुई थी

लोगो के भीड़ और इतनी सारी दुकानों में अलग से दिखना हर दुकानदार चाहता था पर ऐसे में अलग दिखना अपने आप में एक मुश्किल काम होता है

वहीँ इन बड़ी दुकानों के बीच एक छोटा सा गुब्बारे बेचने वाला भी अपने छोटे से ठेले के साथ खड़ा था 

उसने इस इतने बड़े मेले में अलग से दिखने का और सबका ध्यान आकर्षित करने का एक अनोखा तरीका ढूंढ निकला था 

उसके पास एक हीलियम गैस का सिलिंडर था और एक नार्मल गैस का सिलिंडर था 

हीलियम गैस की ये खासियत होती है की वह हवा से हलकी होने की वजह से ऊपर की तरफ जाती है

ऐसे में जिस गुब्बारे में हीलियम गैस भर दी जाए वह ऊपर की तरफ उड़ता जाता है, और अगर उसका धागा छोड़ दिया जाए तो उड़ जाता है

बस इसी बात का इस्तेमाल कर के उस छोटे व्यापारी ने कुछ रंग बिरंगे गुब्बारे हीलियम से भरके हवा में छोड़ दिए 

यह देखते ही जितनी भी दूर जो भी बच्चे बड़े थे सबब उस तरफ जाने लग गए

सब चाहते थे की उनके पास भी ऐसा ही उड़ने वाला एक गुब्बारा हो

बस इसी होड़ में उसकी बिक्री बढ़ गयी

थोड़ी देर के बाद जैसे ही उसकी बिक्री काम होती, वो फिरसे कुछ रंग बिरंगे गुब्बारे हवा में छोड़ देता

ऐसा करते ही फिरसे उसकी बिक्री बढ़ जाती

काफी देर तक यह सब चलता रहा

दुकानदार के काफी गुब्बारे भी बिक गए और वह बहुत खुश भी था 

बड़ी देर से एक बच्चा दुकानदार को ऐसा करते देख रहा था

उसके मन में एक जिज्ञासा थी जो उसे तंग कर रही थी

हिम्मत जुटा के वह उस दुकानदार के पास जा कर बोलै

बच्चा - " क्या आप इस काले गुब्बारे को छोड़ोगे तो यह भी उड़ेगा ?"

उसका इतना मासूम और दिल छू लेने वाला प्रशन सुन कर दुकानदार से रहा नहीं गया और वो प्यार से उसे समझने लगा

दुकानदार - " बेटा अगर मई इस काले गुब्बारे को भी छोडूंगा तो यह भी ऊपर ही जाएगा"

दूकानदार - " इन गुबारों का ऊपर जाना इनके बाहरी रंग और रूप की वजह से नहीं, बल्कि इस पर निर्भर करता है की उसमे अंदर भरा क्या हुआ है "


Moral:

यह कहानी कई सीख देती है

1) अगर आपको कुछ ऐसा पाना है जो आजतक आपने नहीं पाया तो आपको कुछ ऐसा करने की ज़रूरत है जो आजतक आपने नहीं किया 

दुकानदार तो कई थे उस मेले में, पर हर कोई इतना दूरदर्शी और बुद्धिमान नहीं था की वह लोगों का ध्यान अपनी तरफ खींच पाए

2) कुछ पाने के लिए कुछ दांव पर भी लगाना पड़ता है

उस मेले में गुब्बारे वाले भी कई थे पर सबमे अपने कुछ गुब्बारे मुफ्त में हवा में छोड़ने की इच्छा शक्ति नहीं थी 

उन्हें यह नहीं दिख रहा था की कुछ चीज़ मुफ्त में बाँट कर वह काफी मुनाफा कमा सकते हैं

3) यह इस कहानी की सबसे बड़ी सीख है, 

आपको ऊँचा आपका रंग रूप, या और कोई श्रृंगार नहीं बल्कि आपका अपना नजरिया अपने और दुसरो के प्रति उठता है 

आप कितने भी अच्छे क्यों ना दीखते हो पर अपने आस पास आप पाओगे की दोस्त उसी के ज़्यादा होते हैं जिसका नजरिया बेहतर हो

इसी तरह सफलता भी उसी के कदम चूमती है जो सफल होने का नज़रिया रखता है

4) दुसरो की इज़्ज़त करना और कभी घमंड नहीं करना

आपने देखा होगा की जब वह बच्चा उस दुकानदार के पास गया तो वह दुकानदार बहुत ही व्यस्त था, पर फिर भी उसने उस बच्चे से बड़े ही नम्रता से बात की

उस दुकानदार के उस नरम और प्यार भरे रवैये ने जो आत्मविश्वास और प्यार उस बच्चे में जगाया होगा वह अनमोल है  ॥



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6) एक भिखारी और लड़की - Best Stories in Hindi with Moral



एक वक़्त की बात है

जर्मनी के एक शहर में त्यौहार का माहौल था 

सारे मुसाफिर इधर उधर दुकानों और झूलों में मस्ती कर रहे थे 

वहीँ एक सड़क में कोने पर ठण्ड में ठिठुरता एक भिखारी बैठा हुआ था 

उस भिकारी की हालत बहुत ही खस्ता थी, और कोई भी उस पर नज़र नहीं डाल रहा था

ना ही कोई उसके पास जाना चाह रहा था क्यूंकि वह बहुत ही मैले कपडे पहने हुए था 

तभी वहां से गुज़री एक औरत जो अधेड़ उम्र की थी उसकी नज़र उस भिखारी पर पड़ी

वह औरत उसके पास गयी और उससे पूछने लगी की उसे ठण्ड तो नहीं लग रही

भिखारी को लगा की वह महिला उसका मज़ाक उदा रही है

उसने उसे बुरी तरह डांट दिया

उस महिला, जो की काफी अमीर लग रही थी, हार मानने को तैयार नहीं थी

उसने फिर पुछा अगर आपने कुछ खाया ना हो तो मेरे साथ चल लीजिये

इस को सुनकर वो भिखारी और ज़्यादा गुस्सा हो गया और ज़ोर ज़ोर से उस महिला पर चिल्लाने लग गया

बस फिर क्या था पास में ड्यूटी पर तैनात एक पुलिस अधिकारी मौके पर आ गया 

तब तक महिला ने उस भिखारी को एक तरफ से उठा रखा था

पुलिस वाले के पूछने पर की आपको कोई दिक्कत तो नहीं कर रहा यह भिकारी, महिला ने जवाब दिए, नहीं

साथ ही महिला ने पुलिस वाले से उसकी मदद करने को कहा

वह बोली की मैं इसे पास की एक होटल में लेजा कर खाना खिलाना चाहती हूँ

इस पर पुलिस वाले ने उस भिखारी को उठाने में मदद करते हुए उस भिखारी को भी समझाया की वो महिला तुम्हारी मदद करना चाहती है

भिखारी फिर भी उस महिला की साथ नहीं जान चाहता था

पर पुलिस वाले की डर से वह उस महिला और पुलिस वाले की साथ होटल तक पंहुचा

अंदर पहुंचते ही पुलिस वाले को देख, होटल का मालिक वहां आ गया 

मालिक - " क्या हो गया है साहब, यह भिखारी कोई दिक्कत कर रहा है क्या"

इस पर महिला बोली, नहीं, हमारे लिए एक टेबल बुक कीजिये, हम यहाँ खाना खाने आए है

यह देख कर होटल का मालिक भौचक्का रह गया

वह बोलै, मैडम यहाँ ऐसे भिखारियों को लाना मना है, इससे हमारी होटल की छवि खराब होती है

बस इतना बोलना ही था, की वह महिला बोली, आप शायद जानते नहीं मैं कौन हू

जिस बड़ी कंपनी में आपने कल कैटरिंग की थी, मैं उसी कंपनी की CEO हूँ

महिला ने बिना घमंड दिखाए अपना परिचय दिया, तथा अपना ऑफिसियल कार्ड दिखाया 

यह देखते ही मैनेजर की सिटी पिट्टी गुल हो गयी

इसी बीच महिला ने पुलिस अधिकारी से भी पूछा की आप भी हमारे साथ बैठ कर कॉफ़ी का आनंद ले लीजिए

इस पर पुलिस वाले ने अपने ड्यूटी पर होने की बात कही

तभी मैनेजर ने बोलै की आप कॉफ़ी लेकर ड्यूटी पर चले जाइये

इतना कहकर मैनेजर चला गया

उसके जाते ही, उस महिला ने उस भिखारी को खुद को पहचानने को कहा

महिला - " क्या आपने अभी तक मुझे पहचाना नहीं ?"

यह सुन कर भिखारी बिलकुल भौचक्का रह गया, साथ ही पुलिस अधिकारी भी सोच में पड गया 

भिखारी - " नहीं मैं तुम्हे नहीं जानता "

महिला - " याद कीजिये आपने एक छोटी बच्ची की मदद की थी, जब वो ठण्ड में भूखी खाना तलाश रही थी "

यह सुनते ही भिखारी उस महिला को पहचान गया

फिर महिला ने पूरा किस्सा सुनाया

जब वो महिला नयी नयी जर्मनी में आयी थी तो उसके पास पैसो की बड़ी तंगी थी, साथ ही उसे घर से भी किराया ना देने की कारण निकाल दिया था 

बचे कूचे पैसो से वह कुछ ढंग का खरीद की खाने की लिए इसी होटल पर पहुंची थी

तब ये भिखारी ही काउंटर पर था

उसने इस छोटी बच्ची की यह हालत देख कर उसे एक बड़ा सा सैंडविच फ्री में दे दिया था

और अपने पैसों से उसकी पेमेंट की थी

बाद में इस बच्ची को एक अच्छी नौकरी मिल गयी और कुछ सालों में अपनी मेहनत से आज वो उस कंपनी की सबसे बड़ी अधिकारी बन गयी

पर आज भी उस लड़की की ज़ेहन में वो रात और उस भिखारी का चेहरा बसा हुआ था 

उसने भिखारी को अपना बिज़नेस कार्ड पकड़ते हुए कहा की आप हमारी कंपनी में आ जाइये, हमारे पास आपके लिए कुछ ना कुछ अच्छा काम ज़रूर होगा

यह सब सुन कर पुलिस वाले की भी आँखें नम थी

तभी मैनेजर खुद कॉफ़ी लेकर आ गया, और पुलिस वाले को पकड़ा दी

इस पर महिला बोली की मैं आपसे चीनी कम रखेंगे की ज़्यादा पूछना ही भूल गयी थी, तो ये कॉफ़ी बिना चीनी की कड़वी होगी

पुलिस वाला - " मैडम आप लोगो की ये बातें सुनकर, ये कड़वी कॉफ़ी खुद बा खुद मीठी लगेगी, कॉफ़ी के लिए शुक्रिया, अब मुझे ड्यूटी पर जाना होगा "

ऐसा कह कर वह पुलिस अधिकारी वहां से चला गया 


Moral:

इस कहानी से हमे जो सबसे बड़ी सीख मिलती है, वो यह है की नेकी कभी भी खली नहीं जाती

आप जितना सोच नहीं सकते, उससे भी बेहतर तरीके से वो लौट क आपके पास आती है

इसलिए कभी भी किसी की मदद करने से मत कतराओ

एक और बहुत बड़ी सीख, जो ये कहानी देती है वह यह है की आपकी की गयी नेकी से दूसरे भी प्रभावित हकार नेकी करने के बारे में सोचते है

तो नेकी करो, पर बिना घमंड किये दुसरो को भी तरीके बताओ नेकी करने के

कई बार लोग सिर्फ इसलिए नेकी नहीं कर पाते क्यूंकि उन्हें पता ही नहीं होता की करें क्या



अगर आपको ये कहानियां अच्छी लगी हो तो ना सिर्फ अपने दोस्तों और परिवार वालो को बल्कि हर उस शख्स को इसे भेजो जो इसे पढ़ कर नेकी करने का सोच पाए



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